पानी सी,
सरक जाती हैं !
जीवन की ,
अंजुली से !
सम्वेंदनाएं,
भावनाएं तथा ,
संबंधों की कलियाँ,
फूल होने तक ,
तब,
जब ,
आकार लेता है ,
युक्तियों का केक्टस,
हथिलियों पर !!
: मनीष सिंह
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