Wednesday, October 16, 2013

भीड़ और एंकाकीपन !

रास्ते , पड़ाव,

भीड़ और एंकाकीपन,

रंगमंच, सूनापन,

सब ,हमसे ही तो है,

वैसे ही,

जैसे समुद्र का,

लहर खता पानी,

झील में सुना,

रहता है और,

नदियों , नेहरों में,

अटखेलियाँ लेता,

अनगिनत भावों में,

रचनाएँ रचता हुआ,

फिर समुद्र

में जा मिलता है,

फिर से कुछ

कर गुजरने को ,
भाप होकर !!

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