व्यवस्थाएं,
और हम,
तलाशते है ,
एक दुसरे को,
सतत जीवन की,
पहचान यात्रा में,
सांसों की डोर ,
के थमने तक !
परिधि,
सरकारी,
सामाजिक,
पारिवारिक,
व्यवस्थाओं की,
बढती ही जाती
है,
आकाशगंगा सी,
खोज यात्रा में,
इन सब की
!
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