Manish Awadh Narayan Singh
Tuesday, September 3, 2013
बच्चों की हथेलियों में !!
बचपन ,
चला गया,
जैसे हरश्रिंगार,
बिखर जाता है ,
ओस संग,
धरती पर !
महक रह जाती है,
देर तक ,
स्कूल जाते,
बच्चों की हथेलियों में !
वो रास्ते पर,
खड़ा पेड़,
याद रहता है,
दिन बा दिन,
वयस्क होते हुए !
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