Tuesday, September 3, 2013

बच्चों की हथेलियों में !!

बचपन ,
चला गया,
जैसे हरश्रिंगार,
बिखर जाता है ,
ओस संग,
धरती पर !

महक रह जाती है,
देर तक ,
स्कूल जाते,
बच्चों की हथेलियों में !

वो रास्ते पर,
खड़ा पेड़,
याद रहता है,
दिन बा दिन,
वयस्क होते हुए !

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