Saturday, September 7, 2013

आशाएं , भ्रमित रखती हैं !!

आशाएँ, 
आकांक्षाएँ,
अभिलाषाएँ , 
रोके रहती हैं,
अनगिनत,
सिन्धु एवं गंगाएं,
पलकों पर !

निर्बाध,
बह निकलती हैं,
आँसू बन,
अवसरों पर, 
दोनों के , 
पूरा होने ,
और, ना होने पर भी  !

आशाएं , 
भ्रमित रखती हैं !
सिन्धु ,
रुके रहते हैं,
निरंतर,
अचेत , होने तक ,
बहने के लिए !

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