आशाएँ,
आकांक्षाएँ,
अभिलाषाएँ ,
रोके रहती हैं,
अनगिनत,
सिन्धु एवं गंगाएं,
पलकों पर !
निर्बाध,
बह निकलती हैं,
आँसू बन,
अवसरों पर,
दोनों के ,
पूरा होने ,
और, ना होने पर भी !
आशाएं ,
भ्रमित रखती हैं !
सिन्धु ,
रुके रहते हैं,
निरंतर,
अचेत , होने तक ,
बहने के लिए !
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