काला धुआँ उड़ाती,
गाड़ियाँ, प्रदूषण,
जांच के बिना,
दौड़ती फिरती हैं,
विकास-पथ पर !
सफ़ेद कबूतर,
उड़ाते हैं,
सफेदपोश,
नीवों में सैकड़ों,
बलि ले कर खड़े,
मुग़लकालीन क़िलों,
की " प्राचीरों " से !
विकास,
आवश्यकतानुसार
परिभाषित है,
सरकारी, संविधान में !
----:: ---- मनीष सिंह ----::----
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