Manish Awadh Narayan Singh
Friday, May 3, 2013
" भाप " पानी से, अधिक झुलसाती है !!
ज़िन्दगी,
पठारों जैसी,
भारी है !
सैकड़ों हजारों,
मुद्दों भरी है !
हल्की हो तो,
कट जाती,
बीत जाती,
आसानी से !
यथार्थ ये भी है,
तपन , तपिश,
बढती है,
हल्केपन में भी !
" भाप " पानी से,
अधिक झुलसाती है !
:: मनीष ::
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