चिनारों पर पतझड़ है !!
इन दिनों,
" चिनारों "पर पतझड़ है !
सब दिखता है,
इस पार से,
उस पार तक !
सही है,
ऊँचाइयाँ भी,
निर्भर है !
लघु-आयु,
अस्तित्वों की!
संवाद, विचार,
सामंजस्य,
बांधे रखते है !
इनका आभाव,
आर-पार कर देता है,
सब कुछ , सभी कुछ !!
संबंधों में पतझड़,
<>< मनीष सिंह ><>
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