सुनते हैं, होली आती है !
लकड़ी की आंच,
बर्तनों की कालिख,
कुंठा और प्रतिशोध,
की लाली , आँखों में,
कमजोर शरीर,
पीलापन लिए,
दिहाड़ी की आस,
बे रंग पानी के लिए !
इतने रंगों की,
दुनिया, रोज़ है !
सडक के किनारे
के जीवन में,
होली के रंग ;
बच्चे का गिलास,
दूध से और पेट
नहीं भरते ,
मजबूर, मजदूर का !!
सुनते हैं, होली आती है !
तो आये !
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