Monday, February 25, 2013

उसी घर की, खुशियों के लिए !!

चन्दन-लोहबान का
धुआ, सब खुशबू ,
बिखेर चुका था,
खुशियों और आनंद
के लिए !
आज उसके घर,
पूजा जो थी !

कल दफ्तर में ,
अधिकारी के क्रोध,
का  ताप ,
झेल लेगी वो,
अधिक अगरबत्तियां,
लपेट कर,
उसी घर की,
खुशियों के लिए !!  


<><><>< मनीष सिंह ><><><>

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