चन्दन-लोहबान का
धुआ, सब खुशबू ,
बिखेर चुका था,
खुशियों और आनंद
के लिए !
आज उसके घर,
पूजा जो थी !
कल दफ्तर में ,
अधिकारी के क्रोध,
का ताप ,
झेल लेगी वो,
अधिक अगरबत्तियां,
लपेट कर,
उसी घर की,
खुशियों के लिए !!
<><><>< मनीष सिंह ><><><>
धुआ, सब खुशबू ,
बिखेर चुका था,
खुशियों और आनंद
के लिए !
आज उसके घर,
पूजा जो थी !
कल दफ्तर में ,
अधिकारी के क्रोध,
का ताप ,
झेल लेगी वो,
अधिक अगरबत्तियां,
लपेट कर,
उसी घर की,
खुशियों के लिए !!
<><><>< मनीष सिंह ><><><>
No comments:
Post a Comment