Manish Awadh Narayan Singh
Friday, February 22, 2013
... मंझा, धागा, हुचका, और उत्साह !!
"कटी-फटी पतंग,
गीला अरारोट,
मंझा, धागा, हुचका ,
और उत्साह !
दिन बीत जाता,
आस में, की ,
पतंग उड़ जाएगी !!"
"वो और मैं,
हम सब,
आशान्वित है,
बिखरी संभावनाएं,
सिमित साधन,
ले चलेंगे हमें भी,
ऊँची उड़ान पर ;
अधिक प्रगति की !!
"
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