Tuesday, November 13, 2012

...किसी के मिटटी के दिए लाने हों , रूई की बाती लानी हो.....

          " दीपावली " जी हाँ रौशनी का त्यौहार ...किन्तु इस के आते ही पुरे मोहल्ले में " प्रतिभावान " लड़कों के कमी सी पद जाती है ...अचानक !!
          सामान्य दिनों में किसी भी कोने पर दो चार के झुण्ड में कभी भी देखा जा सकता है और मन में विचार लाया जा सकता है ..." दिन भी कुछ काम नहीं इनको , बस नुक्कड़ पर खड़े रहने के सिवा " , पता नहीं पढ़ते लिखते भी हैं की नहीं ...आते जाते नमस्ते करवा लो इन से ...अरे बढती जवानी के लड़के हो अपनी बुध्ही का इस्तेमाल करो ...लिकिन मजाल है को कोई तस से मस हो जाए ...!! पता नहीं दिन भर की विषय पर चर्चा करते हैं की ख़तम ही नहीं होती ? और अगर कभी कभी दूर भी जाते हैं तो ये कहते हुए की ...चल मिलते हैं ..." बताइये .....ये क्या बात हुई !! कपडे ब्रांडेड पहनेगे ...!! वैसे तो सब रहते सूटेड बूटेड हैं फिर भी इनको अपने घर में कोई निमंत्रण दे कर नहीं बुलाता !!
        लेकिन दिवाली के आते ही देखिये इनका जौहर !! क्या थॉमस अल्वा एडिसन , जेम्स वाट ने बिजली और रौशनी की ख़ोज में अपना कमाल दिखाया होगा ...उन महान लोगो से 100% ज्यादा महानतम काम में दख्श हो सकते हैं ये नुक्कड़ के लड़के !! कैसे ? लीजिये कुछ उदाहर्ण प्रस्तुत हैं :

       अब तीन दिन बाद धनतेरस होने की बात चल पड़ी थी मोहल्ले में ! गोस्वामी जी का बेटा इस साल शायद आ ना सकेगा दिवाली में ...अभी पिछले साल ही तो 12000वि रैंक आई थी उनके बेटे की ...ओ बी सी और उसके दादा जी के स्वतंत्रता सेनानी के कोटे से एक दोयम दर्जे के एन्जेनिरिंग कालेज में दाखिला मिल गया था ... कम्पुटर साइंस में !! मारे गर्व के फूले नहीं समाते थे दोनों ! वैसे दो बेटियां है बड़ी डबल एमे , और एक लड़के से छोटी बी एस सी कर रही है माइक्रो बैलोजी में लेकिन उनको तो अपने बेटे की दोयम उपलब्धि पर नाज़ था ...बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी थी और छोटी अभी पढ़ रही थे ...गिन के तीन लोग घर में ....बेटे के जाने के बाद !!  गोस्वामी जी ज़रा शारीर से कैलाश पर्वत सामान थे ....तो चलना मुहाल था ...और पत्नी जी ..बस झाड़ू लगा लेती थी ...और बाकि घर का काम काम वाली करती है !! खाना पीना तो बिना किसी संकोच के छोटी बेटी करती थी !!
      अब धनतेरस आ रहा है ! सफाई करनी है ! और घर सजाना है ...! भीतर भीतर का सजाना हो बड़ी शुध्ही से सब ने मिल कर कर लिए लेकिन बाहर की लड़ियों और साज सज्जा का काम कौन करेगा .....?? बेटा तो कालेज में कुछ और ही सजाने में मगन है इस साल , पिता जी शरीर संभल रहे हैं ...!! फ़ोन कर के इलेक्ट्रिशियन को पुछा तो बोला " 1000 रूपय लगंगे और दो दिन बाद आऊंगा ! अरे कल धनतेरस है और वो दिवाली वाले दिन लाइट लगाएगा तो क्या तो लक्ष्मी जी आएँगी और क्या मोहल्ले में इज्ज़त रहेगी ? अब क्या किया जाए ?

    अब शुरू होती है मोहल्ले के सब से नाकारा लड़कों की !! आज क्या पता भगवान् धन्वन्तरी के आशीष से प्रतिभा उनमे से अचानक प्रफुल्लित होने लगती है !! और सबसे अजूबी बात की गोस्वामी जी जैसे ना जाने कितने मोहल्ले वाले लोगो को ये दिखने भी लगती है !! सा सम्मान अपने घरो में उन्ही लड़कों को आमंत्रित करते हैं इन शब्दों के साथ : " बेटा - ज़रा हमारी भी लड़ियाँ देख लेना ! रोहन के जाने के बाद हमें तो कुछ पता ही नहीं की की कैसे के होता है !! अब तुम खुद ही देख लेना और सजा देना अपने आप सब ठीक से .... वो अन्दर के दीवान के अन्दर रखी हैं .... अंजू मदद कर देगी ढूँढने में ...!! अब देखिये क्या कमाल की बात है ! जिन लड़कों के साये से भी पुरे साल अपने बच्चों को ये दंपत्ति दूर रखता है वो आज दिवाली के मौके पर अपने घर में आने का आमंत्रण देता है और अपनी बेटी के साथ हाथ बटाने की बात करता है !! कमल का टेलेंट जन्म ले लेता हैं इनमे !!  कोल्ड काफी , हॉट टी और बर्गर के साथ लाइटिंग का काम पूरा कर के ही हटाते हैं ये प्रतिभवान लड़के ! एक से काम ना निबटे और अगले घर की टी भी लेनी हो तो मिल जुल कर काम करते हैं ....कैसी भी उलझी लड़ियों का काम हो ...बास चुटकियों में सुलझा देते हैं भाई !! बड़े गुणी लड़के हैं !! रंग बिरंगी झालर , बाज़ार से लाते हैं ...पसंद ना आये तो बिटिया को उन्ही के 1995 के स्कूटर पर बैठकर ले जा कर पसंद करवा कर जिमेदारी से लगते हैं !! बिजली तो उस दिन जैसे कालिया नाग बन जाती अहि उस दिन ...बिलकुल सीढ़ी और आज्ञाकारी ! कैसी भी समस्या मिनटों में सोल्व ! फिर आशीर्वाद मिलता है तानो के साथ : बेटा तुम इतने समझदार और होशियार हो ...सारा दिन घुमते रहते हों थोडा पढ़ा लिखा करो ...!  अब इनसे पूछे कोई ये सब क्या ज़रुरत रहती है कहने की ?  खुद का बेटा चाहे अपने कालेज के घर को ना सजा  कर अपने टूशन टीचर के घर की लड़ियाँ ठीक कर रहा हो लेकिन , इनको तो हम में खोट दीखता है ना !!
             आधुनिकता और तेज़ चलती इस दुनिया में हम भारतियों के त्यौहार आज भी अपनी गरिमा और गति बनाये हुए हैं जो काल के चक्र के चलने के बावजूद अपनी धुरी से अलग नहीं होने देता ..... जैसे ये लड़के पुरे साल जी घर में सिर्फ अपनी नज़रों से दाखिल होते रहते हैं को त्योहारों के मौके पर सा शरीर निमंतरण दे कर बुलाये जाते हैं और जिम्मेदारी से अपना काम कर के फिर अगले बरस की प्रतीचा में लग जाते हैं ....और ये सिलसिला चलता रहता है ..अगली पीढ़ी के आने तक !!  किसी के मिटटी के दिए लाने हों , रूई की बाती लानी हो, खील , खिलोने , बताशे लाने हों , गणेश , लक्ष्मी की मूर्ति लानी हैं , गेंदे की फूल माला , आम के पत्ते , घर के दरवाजों पर तोरण सजाना हो ....या भी लड़ियों के ठीक किये जाने से ले कर उनको लगाने तक के सब काम कर सकने की प्रतिभा जिन लड़कों में है वो शिक्षित किस मायने में नहीं है , ये निर्णय कौन करेगा !! शायद वो लड़के स्वयं क्यों की स्वयं का मूल्यानकन .... प्रमाणिक और प्रत्यक्ष होता है !! साल भर के बाद एक बाद कार्य को करवाते समय गुणों का आंकलन ...अनुबंधित होता है !!
              आज मोहल्ले और गलियों की धमनियों में बहता अपनापन निजिता और सामाजिकता को जीवित रखे हुए है , इश्वर से प्रार्थना करते हैं की मोहल्लों की जीवन्तता ऐसे ही बनाये रखिये !!
   

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