Friday, October 12, 2012

...... कम्पित , पत्ते पीपल से !!

मेरा मन ,तुम्हारा मन,


उमीदें , सपने कल के !

नयनों में ही पलते, या

अश्रु होते , अविरल से !!


स्थिरता स्वाति बूंदों की,

परिवर्तन की आस लिए,

भावावेश की आंधी में ,

कम्पित , पत्ते पीपल से !!



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