" कुछ सूखी पत्तियों और फूलों की पंखुड़ियों को अपने मुट्ठी में दबाये एक सुन्दर सा बच्चा अपने घर की तरफ भगा चला जा रहा था ,,,,,इतना परेशां की अगर किसी ने उसको घर पहुचने से पहले देख लिया , रोक लिया और पूछ लिया की उसके हाथों में क्या है तो सारा भेद खुल जायेगा ....उसको सब बताना पड़ेगा ...कितना कीमती सामान है वो जिसको किसी के भी साथ नहीं बांटना चाहता....!."
"कुछ एसा ही करते हैं हम ....अपने आप ही अपने लिए किसी भी एक या दो या फिर उस से भी ज्यादा सामान को कीमती , महत्वपूर्ण बना लेते हैं .....अपना अपना दृष्टिकोण है .. या फिर समय और समझ का प्रतिवेदन जिसके कारण ये सब होता है .... !!
किसी भी चीज़ की महत्तता उसके प्रयोग पर निर्भर नहीं करती जितना की हम उसे प्रयोग के लायक समझते हैं .....! अब संग्रहालयों में रखी वस्तुओं को ही देख लीजिये ....कितना प्रयोग में आती हैं ...किन्तु महतवपूर्ण हैं !! इसी प्रकार से रिश्ते होते हैं , सामान्य और महत्वपूर्ण !! भोतिक वस्तुओं और रिश्तों में सिर्फ इतना अंतर है ....एक सिर्फ एक के उठाए कदम पर महतवपूर्ण होता है और रिश्ते दोनों और के उठाये क़दमों की महत्ता एवं गंभीरता पर निर्भर करते हैं .......!!
Sahi kaha ! दृष्टिकोण the most important.
ReplyDeleteShat Pratishat Sahi....
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