Tuesday, February 7, 2012

....... मन दर्पण, सब दरवाज़े !!

"पलकों की  सब ख़ामोशी,
 और, होठों से कुछ आवाजें!
 सन्नाटे की गुन-गुन लोरी,
 सपनो - सपनों, परवाज़ें !!" 
 मैं हूँ मेरे सपने भी हैं पर,
 ख़ामोशी और आवाजें ना !
 खुलते-खुलते खुल जायेंगे,
 मन दर्पण, सब दरवाज़े !!"

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