" सफ़ेद चांदनी और हलकी ठंडी हवा ....और आप बस एसा जैसे की सुनसान रेलवे प्लेटफोर्म पर आपकी ट्रेन छूट गयी हो और कोई दोस्त मिलजाए !! ना दिशा का पता , ना परिणाम का पता और ना ही इस बात की चिंता की आप का होगा अगर कुछ सही नहीं हुआ तो.... बस उम्मीद दिखी और हो गए उसके साथ ...!! :
सामान्य ज़िन्दगी मैं सिर्फ साफ़ , ताज़ा और महंगी चीज़ों को पसंद करने वालो को जब इसे इस्थाती का सामना करना पड़ता है तो वो ही कपडे से छानी गयी चाय मिटटी के कुल्हड़ मैं जीवनदायनी लगती है ....फिर वो रूप रंग काम नहीं आता जीने सहारे दिनमें औरों के सामने अपने को अलग दिखने की कोशिश करते फिरते हैं .....जब की मन से पता होता है की सच्चाई क्या है... !!
अनुभा और अनुभव मैं फर्क है ....एक का होना होता है और एक हो ही जाता है ....!! शुभरात्री ...
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