" चन्दन - जल और रंग - पुष्प के बंधन हैं ,
पलकों पर आगंतुक निंदिया, स्नेहिल सा अभिनन्दन है !!
भोर - दोपहर सब कुछ बदला , संध्या आई रात हुई,
हम तुम भी अब कुछ कुछ बदलें, परिवर्तन को अपनाएँ !!
. .............. .... धीरे धीरे सो जायें !!
पलकों पर आगंतुक निंदिया, स्नेहिल सा अभिनन्दन है !!
भोर - दोपहर सब कुछ बदला , संध्या आई रात हुई,
हम तुम भी अब कुछ कुछ बदलें, परिवर्तन को अपनाएँ !!
. .............. .... धीरे धीरे सो जायें !!
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