टूटी सड़कें,
मुझे और आपको,
अकेला नहीं होने देतीं,
उदास होने पर,
राह दिखतीं है,
कुछ और टूटते हुए!
भोर में,
दिन की भीड़ में,
रात के सन्नाटे में,
आवाज़ें देती है,
पूछती हैं,
किस राह चले,
क्यों चले,
फिर हम,
राह तलाश लेते हैं,
अकेला छोड़ देते हैं,
सडकों को, उदासी से,
कुछ और टूटने के लिए !
मुझे और आपको,
अकेला नहीं होने देतीं,
उदास होने पर,
राह दिखतीं है,
कुछ और टूटते हुए!
भोर में,
दिन की भीड़ में,
रात के सन्नाटे में,
आवाज़ें देती है,
पूछती हैं,
किस राह चले,
क्यों चले,
फिर हम,
राह तलाश लेते हैं,
अकेला छोड़ देते हैं,
सडकों को, उदासी से,
कुछ और टूटने के लिए !
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