.....7 अक्टूबर 1991 को लिखा एक गीत ... संकलित !!
***** आ जाना तुम माझीं बन *****
यादों की नदियों के तट पर,
जब-जब दुःख की लहरें हों !
मुझको साथी पार लगाने,
आ जाना तुम माझीं बन !!
<>*<>*<>पहला अंतरा <>*<>*<>
जिनमे ह्रदय की सब कलियाँ ,
कुछ खुशियाँ बनकर खिल जाएँ !
उन खुशियों संग कुछ आंसूं भी ,
जब पलकों पर ठहरे हों ;
उनको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!
<>*<>*<> दूसरा अंतरा <>*<>*<>
अन्जान दुखों का अँधेरा ,
जब बादल बनकर छा जाये !
दूर किनारे रहूँ अकेला ,
बींच भंवर के पहरे हो ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!
<>*<>*<> तीसरा अंतरा <>*<>*<>
दूर हों मंजिल और अकेला ,
चलता-चलता थक जाऊं !
जीवन के इस लम्बे पथ पर,
चिन्ह न पिछले गहरे हों ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!
<>*<>*<>
यादों की नदियों के तट पर,
जब-जब दुःख की लहरें हों !
मुझको साथी पार लगाने,
आ जाना तुम माझी बन !!
::::::::: मनीष कुमार सिंह :::::: on dated 07-10-1991 originally written ..
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