Monday, February 4, 2013

........ आ जाना तुम माझीं बन !! .....7 अक्टूबर 1991 को लिखा एक गीत ... संकलित !!


.....7 अक्टूबर 1991 को लिखा एक गीत ... संकलित !!

***** आ जाना तुम माझीं बन *****

 यादों की नदियों के तट पर,
     जब-जब दुःख की लहरें हों !
             मुझको साथी पार लगाने,
                   आ जाना तुम माझीं बन !!

<>*<>*<>पहला अंतरा <>*<>*<>

जिनमे ह्रदय की सब कलियाँ ,
कुछ खुशियाँ बनकर खिल जाएँ !
उन खुशियों संग कुछ आंसूं भी ,
जब पलकों पर ठहरे हों ;
उनको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

<>*<>*<> दूसरा अंतरा <>*<>*<>

अन्जान दुखों का अँधेरा ,
जब बादल बनकर छा जाये !
दूर किनारे रहूँ अकेला ,
बींच भंवर के पहरे हो ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

<>*<>*<> तीसरा अंतरा <>*<>*<>

दूर हों मंजिल और अकेला ,
चलता-चलता थक जाऊं !
जीवन के इस लम्बे पथ पर,
चिन्ह न पिछले  गहरे  हों ;
मुझको साथी पार लगाने ,
आ जाना तुम माझी बन !!

                <>*<>*<>

यादों की नदियों के तट पर,
    जब-जब दुःख की लहरें हों !
        मुझको साथी पार लगाने,
           आ जाना तुम माझी बन !!

                        ::::::::: मनीष कुमार सिंह :::::: on dated 07-10-1991 originally  written ..



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