Manish Awadh Narayan Singh
Thursday, May 9, 2013
" पलाश " के फूल !
मुस्कुराते हुए,
लहराते हुए,
खिलखिलाते हुए,
रहते हैं,
सुबह की खुश्बु,
भोर की ठंडक,
दोपहर की धुप,
से बाबस्ता,
रोज़ दीखते हैं !
" पलाश " के फूल,
हमारे आपके,
मन की तरह,
सब सहते हुए
समर्पित से !
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