वसंत आने को है !
तेयारी में,
पुराने पत्ते,
टूटते हैं,
बिखर जाते हैं !
शहर-शहर,
आशाओं का,
गीलापन,
तपते तलवों,
में
प्राण डालता है !
जैसे जुड़ते है,
अपरिचित,
एक को,
त्याग कर,
दुसरे से !!
अपरिभाषित,
संबंधों में !!
:: मनीष सिंह ::
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