Tuesday, January 1, 2013

मेरठ में एक दिन .....!!

            रविवार का दिन ....सर्दियों की गुलाबी सुबह , सूरज महाराज का आज जल्दी उठने का कोई मूड नहीं , कोहरे की चादार धीरे धीरे अपने आगोश में सारी रौशनी को लेती हुई ....इंडिया पाकिस्तान का वन डे मैच होना तय आज ही के दिन ....और इन सब मनोहारी परिस्थितियों में घर से मेरठ जाने की तय्यारी करते हुए , बार बार बजते घडी के अलारम को अगले 5 मिनट के लिए सेट करते हुए !!
 
           हम दोनों भाई बहन निकले सुबह सवेरे लगभग 5:30 पर बस अड्डे की तरफ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की पहली बस में चढ़ गए ... उसी इम्तेहान को देने और भी बहुत से बच्चे पहले ही से उस बस में बैठे थे ! बस लगभग 7:30 बजे मेरठ बस अड्डे पर  पहुचे !! वहां से किसी भाई से पूछ कर मेरठ की महानगर बस सेवा की बस में सवार हुए जो की रलवे स्टेशन से मीडिकल तक का सफ़र करती हैं , तेजगढ़ी चौपले पर उतर गए , कुछ कदम चले तो लगा की आज मेरठ को हम ही जगाने आये हैं ... पूरी सड़क सुनसान !! कुछ ही देर में स्कूल आ गया जहाँ एग्जाम होना   था ,  प्लान देखा और 9 बजने का  इंतज़ार करने लगे , इस बीच एक और भाई बहन आ गए और हमारी दोस्ती हो गयी ..दो दूर के शहरों से आये हुआ अजनबियों की एक अनजाने शहर में दोस्ती ....!! हम दोनों भाइयों की बहने अब 9 बजे एग्जाम देने अन्दर चली गयीं !
 अब हम दोनों भाई दोस्त हो कर किसी चाय वाले की तलाश में स्कूल के गेट से बहार की और चल दिये !!    कोहरा अभी भी था हलकी हवाओं ने उसका रुख मोड़ ज़रूर दिया था लेकिन  ठंडक ज़रूर थी !! दो तीन चाट पकोड़ी वाले गोलगप्पे वाले , चिल्ले बनाने वाले , और एक कोने में एक छोटासा लड़का अपनी चाय की ठेली लिए खड़ा था !! एसा लगा जैसे सूखे रेगिस्तान में पानी की धार दिखाई दे जाये !!  हम दोनों लपक कर वहां पहुचे दोनों ने एक एक चाय का आर्डर किया ...खालिस दूध की चाय है बाबु जी ...10 रुपे का एक कप है ...हमने सोचा यार मिल तो रही है ना ...ठीक है दो दो ...बस हम दोनों उसके स्टोव के आस पास ही खड़े हो गए हलकी हलकी गर्माहट से ठेले के चारो तरफ लोग हाथ सकने के लिए इसे खड़े हो गए थे जैसे की बीच में एक गुड की ढेली रखी और उस पर बैठने को तयार मखियाँ भिनभिना रही हो !! 
      हमारी चाय बन कर तयार हो चुकी तो हमें ध्यान आया की आज तो वन दे क्रिकेट मैच है ...मैंने उस चाय वाले को सलाह दी की तुम एक ट्रांजिस्टर का इंतज़ाम कर लो ... लोग जो चाय के बहाने आ रहे है उनकी संख्या दो गुनी हो जाएगी .... ! उसने उसके मोबाइल पर ऍफ़ एम् रेडिओ पर मैच की फ्रिक्व्नेसी सेट कर और मैच शुरू ..एसा लगाने लगा जैसे की शक्कर में मिठास और बढ़ गयी और ...और चीनी ज्यादा मीठी हो गयी हो ....कुछ लोग जो कुछ दूर खड़े थे चाय के ठेले के और करीब आगये ... आर्डर की संख्या बढ़ने लगी , स्टोव की लौ अब और तेज़ हो गयी थी !! अब एक एक बाल पर सबका ध्यान मेच की और जाता था .... और फिर कमेंट्रेटर की कही बात बात सब अपनी अपनी राय देते है ! धीरे धीरे 1 घंटा बीत गया !! अब टिक्की खाने ली इक्चा हुयी ...लिकिन हम नहीं खा सकते थे ...औरों ने खाया और हमें उन्हें खाते हुए देखा !! 
       अब सूरज कुछ ऊँघने लगा था ... !! जैसे बड़ी देर से सोया कोई बच्चा करवट बदल है ! एक दो किरणे दिखाई दी और इसके साथ साथ दिखाई दिए कुछ और लोग / माता पिता / भाई बंधू और अपने अपने करीबियों को इम्तेहान दिलवाने लाये थे लेकिन ठंडक के कारन कही किसी कोने में चुप चाप खड़े थे ....चाय की दूकान , खालिस दूध की चाय , साथ में फेन और इंडिया पकिस्तान के मेच की क्रिकेट कमेंटरी ...और क्या चाहिए भाई ...अचानक चाय वाले की आर्डर और बढ़ गए , वो लड़का बाबूजी बाबूजी करता हुआ ...लगातार चाय बनता जा रहा था और जिस जिस को चाय मिलती जाती थे और एक किनारे खड़े हो कर चुस्कियों के साथ हलकी धुप और किरकेट कमेंटरी का मजा लेने लगता था !!
       सुबह की पली का एग्जाम ख़तम हुआ ! अचानक सब बच्चे आ गए ! चाय वाले पर बोझ  बढ़ गया ! चाय ठीक से पक नहीं पा रही की लोग ले लेते थे , किसी को 10 रूपए की एक चाय होने का दुःख नहीं था ...मुश्किल थी तो इस बात की सब को चाय सिमित समय में मिल नहीं पार रही थी ! अगला पेपर और चाय के बीच सिर्फ 1 घंटे का समय और चाय का मिलना मुश्किल ..खैर जैसे तैसे सब को चाय मिली , सब ने पी और बच्चे अगले पेपर को देने फिर से स्कूल में चले गए ! रहगये हम भाई और बंधू बहार फिर से 3 घंटो के लिए , फिर से मैच , चाय , टिक्की , और अब कुलचे छोले , बर्गर भी मिलने लगे थे !!
                                     किसी खूब सूटेड बूटेड हो कर घुमने वाले बड़े - बड़े अधिकारिओं को ऐसे समय में देखा जा सकता है विचित्र अंदाज़ में घूमते हुए , लड़कियों वाले हैण्ड बैग अपने हाथों मैं खूबसूरती से ले कर यहाँ वहा घूमते नज़र आ रहे हैं !! किसी ने किताबें पकड़ रखी हैं , किसी ने विभिन्न प्रकार के साल्व्ड क्वेश्चन पेपर पकड़ रखे हैं जिनका असल में उनके साथ दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं ....फिर भी है ...! अब तक भारतीय खिलाडियों ने अपने अपने कारनामे और एक दुसरे का साथ निभा दिया था ....5 विकेट पर 29 रन थे ... और धोनी ने आ कर कुछ काम किया और सम्मानित रन तक गए ...!!
                   एक एक कप चाय और पी हमने फिर इंतज़ार करने लगे की कब घंटी बजे और लोग बहार आये ! कुछ देर में लोग बहार आये और हम घर की और चल दिए ! रविवार का दिन रोज़ की ही तरह लगा और घर शाम की चाय पी , खाना खाया समाचार देखे और सो गए अगले दिन फिर से काम पर जाने के लिए ...!! मेरठ कभी अच्छा नहीं लगा मुझे लेकिन क्यों या भी पता किन्तु उस चाय वाले लड़के के साथ और लोगो के साथ बिताये दिन से मेरठ फिर जाने का मन करता है ...उसकी बातें और समझ व्यापार को करने की ...पुरे 6 से 7 घंटे वो चाय बनता ही रहा और जितने लोग उतनी तरह की बातें ...बोलियाँ ...लिकिन उसके माथे पर कोई शिकन नहीं ...और वोही मुस्कुराता चेहरा .... आपको अपने मानस को बदलने की ज़रुरत है ...कोई भी चीज़ अच्छी या बहुत अच्छी लगने लगेगी ...!!                    
  

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