रोज़ रोज़ जिस इंसान से आप दूर रहने की कोशिश करते हैं ....दर असल आप सबसे करीब उसी इंसान के ही होते हैं ...... सही है ....! वैसे हमें ये जीवन जुड़ने के लिए मिला है ... बस जुडे रहिये .... टूटन तो सब के साथ है .. मजा तो जुडे रहने मैं है ...हाँ थोडे समर्पण के साथ ... तब ही आनंद है !!
" मैं सागर हूँ , तुम हो तब ही ,
मैं पर्वत हूँ , तुम हो तब ही !
मैं अम्बर हूँ , तुम हो तब ही ,
मैं सुगंध हूँ , तुम हो तब ही !! "
" तेरे होने पर ही मेरे होने की ,ये सारी नीवें !! "
" तेरे होने पर ही पल-पल गहरी हो जाती हैं ,
सब अतीत की , वर्त्तमान की भाग्य लकीरें !! "
हम सब ये जानते हैं ... हम तब ही हम है जब कोई कहे की आप आप हैं ...और आपको औरों का होने को प्रेरित करे !!
बस आपका ही ..... मनीष सिंह
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