" गलियों-गलियों सौंधी खुशबु ,आँगन-आँगन चेहचाहट ,
चाँद सो गया तान के चादर , सूरज ने भी ली करवट !
धुंध के घुंघट से अब किरणें , हौले हौले गाती हैं ,
किलकारियां शब्द हो गयीं, रहेट कर रहे हैं खटपट !!
भोर हो गयी , अनुभव के कुछ गुंचे फिर मुस्काएंगे ,
जुड़ते-जुड़ते,पल-पल छिन- छिन दिन माला बन जायेंगे !!"
सुप्रभात ! आप का दिन आनंदमय रहे !!
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