" ओस की नन्ही बूंदों से फिर , घर आँगन भीगा ,
हरश्रृंगार की खुशबू फैली , चंचल मन बहका !
रात के गुड्डे गुडिया आये, अटखेली दिखलाएं ,
हम सब अपने सपने देखें , आखें मुन्दलाएं ,
हौले हौले ,गुन गुन करते , धीरे से सो जाएँ ! "
हरश्रृंगार की खुशबू फैली , चंचल मन बहका !
रात के गुड्डे गुडिया आये, अटखेली दिखलाएं ,
हम सब अपने सपने देखें , आखें मुन्दलाएं ,
हौले हौले ,गुन गुन करते , धीरे से सो जाएँ ! "
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