Saturday, October 1, 2011

मौकापरस्ती और सुरक्षित ही चलने वाले कुछ समय बाद अकेले रह जाते हैं....कटु सत्य है !!

" आज एक मदारी को देखा ...... कुछ अटपटा सा लगा ... उसके पास गया और पुछा क्या हुआ , आज उत्साहित नहीं हो ... सब ठीक तो है ना....? उसका जवाब मुझे अन्दर तक परेशान और सोचने को मजबूर कर गया ! 

उसके शब्द थे : " आज मेरा बेटा बीमार है ... और में अपने पिता को ले कर तमाशा दिखाने आया हूँ लेकिन मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा .... मैंने कहा " क्यों ? वो बोला ...

" मैंने हमेशा से अपने लोगो को अपने हिसाब से चलाया है ...और वो चले ... लेकिन आज एसा लगता है की मैंने जिंदगी सिर्फ अपने को अच्छा रखने के लिए जी... और मेरे परिवार ने मुझे खुश रखने को जिंदगी जी..... आज जब मेरा बेटा ( मेरा बंदर ) बीमार पड़ा तो मैंने उसके बाप को मन लिया तमाशे के लिए ...और वो आ गए ...लिकिन जब एक बरस पहले मैंने खुद तमाशा दिखने की कोशिश की थी तो मालूम चला था की .... बहुत मुश्किल काम है ... !! मैंने हर बार अपनी बात को सही ठहराया और अपने को खुश रखा ... आज इतनी आत्मग्लानी है की पानी भी सीसे की तरह लग रहा है... हलक से नीचे नहीं उतर रहा ....!!

  कुछ रौशनी के साथ चले और , दिए हो गए .
        कुछ अंधियारों में रहे और , दिए हो गए.!
              आज अफ़सोस करने की पहल करी जब उसने  ,
                       फिर से अपनों से ,  जीने को झूठ बोला जो उसने ,  
                             सबने पहचान लिया और , मुह सिले रह गए !!
मौकापरस्ती और सुरक्षित ही  चलने वाले कुछ समय बाद अकेले रह जाते हैं....कटु सत्य है !!

1 comment:

  1. Bhaiya kuch sochne pe majboor kar diya :) kuch dhundli si tasveer ban gai deemag mein, laga ki kuch aaisa he hua hae !

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