Manish Awadh Narayan Singh
Saturday, October 26, 2013
अंधेरों में !!
उजाले और अँधेरे,
अनंत रास्तों पर,
समुद्र किनारे,
रेत घुले पानी में,
हौले हौले बतियाते हैं,
छण भर को ही !!
सब कुछ भूल कर,
जैसे मिलते हैं,
दोस्त और दुश्मन,
छणिक,
उजाले खोजते,
अंधेरों में,
मधुशाला के !
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