Wednesday, May 9, 2012

..........इठलाता विस्थापित मन !!

***** सुप्रभातम *****


गंगा की लहरों के संग-संग,
रंग ओढे , सुगन्धित वन !
अलसाई किरणों के आँचल,
इठलाता विस्थापित मन !!

फूलों फूलों, फिर तलाशते,
भंवरे जीवन की बूँदें !
कलियों कलियों स्पर्शों से,
आनंदित होता , यौवन !!

No comments:

Post a Comment