***** सुप्रभातम *****
गंगा की लहरों के संग-संग,
रंग ओढे , सुगन्धित वन !
अलसाई किरणों के आँचल,
इठलाता विस्थापित मन !!
फूलों फूलों, फिर तलाशते,
भंवरे जीवन की बूँदें !
कलियों कलियों स्पर्शों से,
आनंदित होता , यौवन !!
गंगा की लहरों के संग-संग,
रंग ओढे , सुगन्धित वन !
अलसाई किरणों के आँचल,
इठलाता विस्थापित मन !!
फूलों फूलों, फिर तलाशते,
भंवरे जीवन की बूँदें !
कलियों कलियों स्पर्शों से,
आनंदित होता , यौवन !!
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