Tuesday, November 29, 2011

कांच पे लिखी स्याही जैसा ,प्रतिपल का प्रचारित करना !

" मैं होने की अपनी शर्तें , तुम होने के ,अपने राज,
  उनकी कलियाँ धुल और मिटटी, अपने ठूंठ, सुन्दर ताज ! 
  कांच पे लिखी स्याही जैसा ,प्रतिपल  का प्रचारित करना,
  ऐसे जन स्वछन्द कहाँ है , बंधन की उनकी परवाज़ !! "
  
  

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