Monday, November 14, 2011

.............रिश्ते, बर्फ खिलोने से !! "

" कड़वी-खट्टी सी दुनिया ,
   मित्र,  शहद  चबोने से !
   अंगारों सी  उम्मीदें  ,
   रिश्ते, बर्फ खिलोनों से !! "


आते -  आते ,आती है
अनुबंधों   मैं   गर्माहट,
घुलते - घुलते, घुलती है,
वर्षों की सब कडवाहट !!
मन गुलाब सरीखे से ,
चाहें, ओस की बूंदों सी,
किन्तु स्वप्न नहीं आते
काँटों  भरे बिछोनो  पे !!

अंगारों सी उमीदें,
रिश्ते, बर्फ खिलोनो से !!


चुटकी- चुटकी , अपनापन ,
अंजुली- अंजुली , आशाएं !
डिबिया-डिबिया , धुप खिली,
कंकर पत्थर     गरिमाएं !!
प्रतिबंधों   के    उजले पथ,
क्षितिज  सरीखी   मंजिलें !   
मिलने  के  कुछ पर्व नहीं ,
ना  खालीपन    खोने में !

अंगारों सी उमीदें ,
रिश्ते, बर्फ खिलोनो से !!







                    

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