" कड़वी-खट्टी सी दुनिया ,
मित्र, शहद चबोने से !
अंगारों सी उम्मीदें ,
रिश्ते, बर्फ खिलोनों से !! "
अंगारों सी उमीदें,
रिश्ते, बर्फ खिलोनो से !!
मित्र, शहद चबोने से !
अंगारों सी उम्मीदें ,
रिश्ते, बर्फ खिलोनों से !! "
आते - आते ,आती है
अनुबंधों मैं गर्माहट,
घुलते - घुलते, घुलती है,
वर्षों की सब कडवाहट !!
मन गुलाब सरीखे से ,
चाहें, ओस की बूंदों सी,
किन्तु स्वप्न नहीं आते
काँटों भरे बिछोनो पे !!
रिश्ते, बर्फ खिलोनो से !!
चुटकी- चुटकी , अपनापन ,
अंजुली- अंजुली , आशाएं !
डिबिया-डिबिया , धुप खिली,
कंकर पत्थर गरिमाएं !!
प्रतिबंधों के उजले पथ,
क्षितिज सरीखी मंजिलें !
मिलने के कुछ पर्व नहीं ,
ना खालीपन खोने में !
अंगारों सी उमीदें ,
रिश्ते, बर्फ खिलोनो से !!
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