Thursday, January 5, 2012

halke halke कोहरे के संग ,मस्त pavan ka alhadpan,
रात की रानी की kushbu के संग, महका महका sa chandan !
खील बताशे , gajjak , revadi ,मूंगफली की झड़ियाँ,
thankdak की कड़ियों मैं जुड़ते ,मन संग मन के bandhan !!

Tuesday, January 3, 2012

...... धोखा .... First One of My Life !!

         " मेरी बड़ी अम्मा जी का देहांत हो गया था ...१२ घंटे की सूचना पर मुझे अपने पैतृक जिले आजमगढ़ पहुचना था .... जल्दी जल्दी से टिकट करवाया एक गाडी मैं ...जो रात के २.३० बजे वाराणसी पहुचती है ...मैंने नई दिल्ली से गाडी ली और चल दिए ... !!
         अपनी आदत के अनुसार मैं गाडी मैं खाता रहता हूँ और खाने लगा .. चाय , मठरी और अचार   ख्य अ..और बहार के नजारों का आनंद लेने लगा ..... मेरी सीट बीच वाली थी... ठीक मेरे ऊपर वाली सीट पर कोई १५ - १६ साल का एक लड़का लेटा था ...मुझे लगा की वो मुझ से बात करना चाहता था तो अपनी आदत के अनुसार ...बात छेड़ दी... " क्या करते हो ? ...वो बोला ..." जी दिल्ली मैं एयरोनोतिक्स एन्ग्गिनिरिंग करूंगा ...अभी दिल्ली मैं रहता हूँ... अच्छा ...मैंने कहा ...बस फिर रात के १२ बजे तक हम बात करते रहे ... खाना भी साथ साथ खाया ...मेरे ही हाथों से उसने मेरे पड़ोस का एक लैंड लाइन नुम्बर लिए .... तब मोबाइल नहीं था ...ज्यादा चलन मैं ...नहीं था ..!
हमने एक दुसरे ko ४ साल तक कोई फोन नहीं किया ...चार साल बाद एक दिन अचानक पड़ोस के घर पर एक काल आई की पड़ोस के मनीष भैया ko बुला दीजिये.... मुझे बुलाया गया ... मैं बहुत खुश हुआ...चार साल के बाद एक दोस्त की आवाज सुन कर... उसने मोबाइल नंबर दिया मेने भी बात करी...
             फिर तो सिलसिला चल निकला ...हम अक्सर baat कर लिया करते थे , करते रहते थे ...! यहीं ल्क्षमिनगर मैं रहता था वो... उसके कई बार बुलाने पर भी मैं उसके घर नहीं jaa सका ...!
एक बार हम हज़रत निज़मिद्दीन बस के अड्डे पर मिले ...सुबह के कुछ ९.३० का समय रहा होगा ... हम २ घंटे तक साथ रहे ...बातें करी ... साथ अच्छा रहा ..!
           मेरे घर आया वो , पूरा विशवास के साथ रहा हमरे साथ ...उस रात मुझे याद है , बत्ती गुल हो गयी थी और सुबह के चार बजे तक तो इन्वेर्टर चला ...लेकिन उसके बाद हाथ के पंखे से ही काम चलाना पड़ा था ! ...बिलकुल घर के सदस्यों की तरह से रहा वो हमरे साथ !!
          दिन बीतते गए !...हम आपस मैं खूब बातें करते ....एक दुसरे के साथ अपने अपने दुःख सुख बाँट लिया करते थे .... समय बीता !!
          एक रोज़ उसका फ़ोन आया जैसे आता था... उसके कालेज की एक्साम फीस भरनी थी कुछ लगभग ५०००/- रूपये .... उसके पास टाइम कम था ...और उसके पिता के भेजे हुए पैसे कुछ दिनों के बाद आने वाले थे... तो मेरे तरफ उसने हाथ बढाया .... हमने अपने को ये मान कर के हमसे किसी ने अपनापन समझ कर के कुछ कहा है तो हमने भी खुल कर के सहयोग किया .... और उसका एडमिशन हो गया ...समय पर फीस भर सका वो ....

        उस दिन के बाद वो मुझ से कभी  नहीं मिला .... मैंने कई बार कोशिश करी... फेसबुक पर कई बार रेकुएस्ट डाली ...पर कोई जवाब नहीं ...

        " अब वो ताल्लुक रखना ही  नहीं चाहता .... हाँ मूर्खों से सिर्फ .............. काम भर का संपर्क रखना ही ठीक होता है ....ऐसा कुछ महामूर्ख समझते है .... !!  

        मैंने अपने संस्कारों के कारण वो किया जो मुझे मिले ...और उसने क्या और क्यों किया आप स्वयं सोचिये .....!! जीवन  मैं कुछ चीजों का होना निश्चित है .....और कुछ का होना हमारे हाथ ...भाई जो हमारे हाथ मैं है , वो ज़रूर कीजिये .... ख़ुशी मिलती है ...आँखे नहीं चुरानी पड़ती किसी से !! शर्मिंदा तो नहीं होना पड़ता ना अपनी ही निगाहों मैं , हम खुश रहते हैं किसी को को खुश रख कर ....!!     खुश रहिये !! अपनी नज़रों मैं तो शर्मिंदा नहीं होंगे ना !!

आज पूरा हो गया !! मैं खुश हूँ ...लेकिन अफ़सोस है की मेरी दोस्त की लिस्ट मैं इसे लोग भी हैं ...!!

Saturday, December 31, 2011

लगातार कोशिश भी ....कमजोर पड जाती है जब प्रतिउत्तर मैं कुछ चालाकी का अनुभव हो !

साल कोई २००५ या २००६ रहा होगा ...मैं अपने अधिकारिक कार्य से पुदुचेरी के प्लांट मैं जाने की तयारी कर रहा था .....अचानक ये ख़याल आया की इस बार क्यों ना कुछ घूमना भी किया जाए ...तो अपना केमरा भी साथ रख लिया ...! शाम की किंग फिशर की उड़ान थी ... मुंबई से उड़े और चेन्नई के कामराज एअरपोर्ट पर उतर गए ...!

गाडी आगई थे हमें लेने के लिए चेन्नई से पुदुचेरी कुछ २ से २.३० घंटो का सफ़र है ...कार से....अद्भुद सफ़र होता है ..सही मैं , कई बार किया है ... रात के वक़्त तो और भी अनोखा हो जाता है... ई सी आर से ...इस्ट कोस्ट रोड ... हाँ तो हम एअरपोर्ट से निकले ... तिन्दिवानाम होते हुए...रात के कुछ ११ बज रहे थे और सफ़र २ घंटों का था ... हम चले.. ....वैसे तो हवाई जहाज मैं खाना मिला था किन्तु ...मेरे आकार प्रकार के लिए वो कम था... मुझे भूख लग रही थी... लिकिन अब तो हम एअरपोर्ट से निकल चुके थे... तो खाने को भी कुछ नहीं मिलता ...

मैंने ड्राइवर से कहा " भाई कहीं कुछ मिले तो खिला देना ! "
१ घंटा चलने के बाद एक छोटी सी सड़क के किनारे झोपड़ी दिखाई दी... एक कम रौशनी की किरने आ रही थीं ....कुछ लोग भी दिखाई दे रहे थे... घुप अँधेरा ..हमारी गाड़ी किनारे पर खाड़ी कर के ड्राइवर ने तमिल मैं दूकान वाले से पुछा और मुझे कहा सर आइये डोसा , इडली और उत्तपम है यहाँ विथ टी !! मैं खुश ....उतरा ..और हैण्ड वश कर के ..टेबल पर बैठ गया ... कुछ समझ नहीं आ रहा था ..सब तमिल मैं बात कर रहे थे ...और हम इस भाषा को आज तक नहीं समझ पाए ...!
मेरे ड्राइवर ने मुझ से इंग्लिश मैं पूछ कर चार डोसा आर्डर किया .. और मेरे कहे अनुसार एक एक कर के देने को कहा ...बस आदेश मिलने के बाद ...मोटे लोहे के तवे पर नारियल की रेशों से बने एक देसी ब्रश से पानी और नारियल के तेल की छींट मार कर डोसा बनाया जाने लगा ... भाई सच बोलता हूँ ...कुछ चीज़ों का बनाना इतना कलात्मक होता है की उसको खाने से ज़यादा उसको बनते देखने से संतुष्टि मिलती है.... चाहे हमारे गाज़ियाबाद के शर्मा जी की चाट हो या फिर ये डोसा ... बस कुछ देर मैं डोसा , संभार , चटनी , केले के पत्ते पर मेरे सामने थी , और चाय भी .... मेरे साथी ड्राइवर ने इडली मंगवाई अपने लिए ... ...मैंने थीं दोसे खाए ... बस मैं कुछ नहीं समझ पा रहा था की काया बातें कर रहे हैं सब... जब कुछ चाहिए होता था तो इशारा कर के बता देता था ...हाँ मेरा ड्राइवर मेरी मदद कर रहा था ... सज्जन होते हैं ये लोग....वरना तो हम भूखे रह जाएँ इसी जगह पर...  ..........मैंने अपने दोसे ख़तम किये और चाय की चुस्की लेता हुआ झोपड़ी से बहार निकल कर रोड पर गुजरते हुए ट्रक और दुसरे वाहनों को देखने लगा ...सच मानिए ...ये अनोखा अनुभव है ...रात के १२ बजे ...सुदूर दक्षिण मैं एक अँधेरी रात मैं आप डोसा खा कर चाय पी रहे हों ...जहाँ आप किसी से बात नहीं सकते ...क्यों की कोई आपकी भाषा नहीं समझता ... मैं ये सब सोच ही रहा था की अचानक मेरे कानों मैं कुछ जाने पहचाने से शब्द पड़े ..... शब्द थे " यार ये चेप्टर तो कल ही ख़तम कर लेने की बात थी ना ? " .....मुझे लगा भाई यहाँ हिंदी कौन बोल रहा है... देखा तो दो लडके आपस मैं बात कर रहे थे.... मैं लपक के उनके पास गया और पूछा ...कौन है आप और यहाँ क्या कर रहे हो ? वो दोनों वहीँ के पास के एक उनिवेर्सित्य एस आर एम् के पढ़ने वाले थे ... एन्गिनियारिंग कर रहे थे... प्रणव नाम था उस लड़के का ....दुसरे का नाम नहीं याद अभी ...कुछ सालों तक प्रणव से संपर्क था ..आजकल कुछ बात नहीं होती... ये पता है की वो दिल्ली मैं है ...पर संपर्क नहीं है .... ....

हाँ उस मुलाकात के बाद मैं पुद्दुचेरी पहुंचा लगभग १ : ३० बजे ...वहां के मशहूर होटल मैं रुका ...गाँधी बीच के पास ही है ...बस फिर काम शुरू... ये लेख इस लिए लिखा ...दोस्ती हो जाती है ...करी नहीं जाती ...सम्बन्ध जीवित रखे जाते हैं ...रहते नहीं हैं.... लेकिन ये निर्भर करता है ....दोनों पर...किसी एक की लगातार कोशिश भी ....कमजोर पड जाती है जब प्रतिउत्तर मैं कुछ चालाकी का अनुभव हो.....किन्तु ख़तम नहीं होती...
लेकिन हम नहीं बदलेंगे ....दोस्ती करने का सिलसिला चलता रहेगा .....तभी तो मैं हूँ.... जिंदा... सब के लिए सिर्फ अपने लिए नहीं .... 

.... तुम, से आप हो गयी है समय की वाणी,

बचपन मैं खूब पढ़ी किताबें ...अब कहाँ हैं, लगता है की ....हम बड़े हो गए .....

" डायमंड के चाचा,रमन, साबू के फ़साने ,
  चंपक की थपथपी , नंदन  सिरहाने !
  डिबरी के प्रकाश मैं , पिंकी का तराना ,
  विक्रम - बैताल संग आते चंदामामा !! "

 "बीत गए पल - छिन वो, शंखनाद जैसे,
  पुस्तकों से होता नहीं हैं , संवाद वैसे !
  तुम, से आप हो  गयी है समय की वाणी,
  मैं नहीं , तुम भी नहीं हैं ,अपवाद जैसे !! "

Tuesday, December 27, 2011

बन्धनों का शोध है हम, बन्धनों को चाहते हैं !

" बन्धनों से मुक्त होना है,  हमें स्वीकार्य फिर भी,
  बन्धनों का शोध है हम,    बन्धनों को चाहते हैं !
  रिक्तियों से कुछ कभी, आलोक सा मिलता नहीं है,
  जी.., तभी तो सृष्टि के संग, बन्धनों को ब्याहते हैं !! "

 रात बहुत हो चुकी ...अब निंद्रा से बंधन बांधिए ,ताकि स्वप्न आकर्षित हों !
..................... शुभरात्री !!

 

Sunday, December 25, 2011

और पहचान अधूरी !!

 " हमेशा किसी न किसी तरह से पहचाने जाने की भूख , सिर्फ आपको भूखा रखती है ...संतुष्टि नहीं देती ...आप हमेशा भूखे रहते है और पहचान अधूरी !! "

" आज बड़ी है , बड़ा है दिन !! "

" ले के सारे दिन की खुशबू ,
  तिनका-तिनका चन्दन सा !
  सतरंगी अब  रात हो गई ,
  सन्नाटा अभिनन्दन सा !!
  आज के बीते दिन से पनपे ,
  कल की किरणे, इनसे दिन !
  जाते वर्ष की नन्ही आशा ,
  आज बड़ी है , बड़ा है दिन !! "

MARRY CHRISTMAS .... बड़ा दिन मुबारक हो ......!!