" भूलना और याद न रखना दोनों भिन्न - भिन्न बातें हैं " ....यकीनन ....एक का होना प्राकर्तिक है और दुसरे के लिए हैं खुद को तैयार करते हैं ....किसी विशेष घटना के बाद .....लिकिन ये भी सत्य है की , ये याद ना रखने के प्रयास में हम उस शक्स या घटना को ज्यादा - ज्यादा याद रखा करते हैं की उसको भूलना है ......सही है ना.....? सोचियेगा , सबके साथ होता है ये ...!!
Thursday, April 19, 2012
Saturday, April 14, 2012
हम शनिवार को ज्यादा आनंदित रहेत हैं....रविवार की बनिस्बत....!!
" आनंद " जी हाँ कितना मुश्किल होता है इसे प्राप्त करना , और इसके लिए कोई विशेष विषय की आवश्यकता नहीं होती.....
अब देखिये ना ...आज शनिवार है और कल रविवार ....सामान्यतः ये कोई नई बात तो नहीं ...हमेशा ही शनिवार के बाद रविवार ही आता है ....इस मे क्या नया हुआ ....जो प्रफुल्लित और आनंदित होने का मन हो ....?? आइये हम कुछ वार्ता करते हैं ....!!
हम नौकरी पेशा लोग शनिवार को रविवार से ज्यादा आनंदित रहते हैं और रविवार से ज्यादा शनिवार का इंतज़ार करते हैं.....वो इस लिए शनिवार को ऑफिस का काम भी होता रहता है और आनंद भी ये सोच कर की कल काम पर नहीं आना ....जल्दी नहीं नहाना , टाइम पर नहीं दूध लाना , दो से ज्यादा बार चाय मिलेगी सुबह सुबह ....ये सब शनिवार को नहीं होता, हाँ शनिवार के बाद मैं होता है ...रविवार को...तो ये शनिवार है तो रविवार है ...इस लिए हम शनिवार को ज्यादा आनंदित रहेत हैं....रविवार की बनिस्बत....!!
" ये मेरे और आप की बात है ...बस आज का विषय मेरे एक नवीनतम " यात्रा मित्र " ने दिया ....बातों ही बातों मैं उन्होंने कहा ...मैं रविवार से ज्यादा शनिवार को एन्जॉय करता हूँ...आनंदित रहता हूँ...सही कहा ..मेरे और आपके मन की बात कही उन्होंने ...तो आपके मन के बात शब्दों के साथ ...आपके सामने हैं......आनंद लीजिये , प्रफुल्लित रहिये !! "
स्नेह सहित आपका अपना ही .... मनीष अवधनारायण सिंह
Friday, April 13, 2012
"गलियों- गलियों ढोल- बांसुरी, धान और गेंहूँ की सरगम ! "
"गलियों- गलियों ढोल- बांसुरी,
धान और गेंहूँ की सरगम !.
हरा- गुलाबी , लाल - नारंगी,
आँगन आँगन , सब चन्दन !!
बीहू के कुछ श्वेत पुष्प और,
स्नेह दीये , सुख की बाती !
रंगीले पोंगल के संग संग ,
आओ मनाये बैसाखी !!"
हार्दिक बधाईयाँ !!
धान और गेंहूँ की सरगम !.
हरा- गुलाबी , लाल - नारंगी,
आँगन आँगन , सब चन्दन !!
बीहू के कुछ श्वेत पुष्प और,
स्नेह दीये , सुख की बाती !
रंगीले पोंगल के संग संग ,
आओ मनाये बैसाखी !!"
हार्दिक बधाईयाँ !!
Wednesday, April 11, 2012
सब की अपनी अपनी ख्वाहिशें हैं और अपने अपने भगवान् ...!!
" आज बारिश का सा मौसम हुआ है ...हाँ बरस भी सकते हैं ...!! संभावना है .......पार्क मैं मोटापे और शुगर से परेशान लोग घूमते हुए ज़िक्र कर रहे हैं की काश बरस जाते तो मौसम सुहाना हो जाता और घूमने का मजा कुछ और होता ....!!
ये लोग घूमने इस लिए निकलते हैं की कुछ अनियमित खा कर शुगर और शारीर बिगड़ गया है ...और सुधार के लिए घूमना चाहते हैं .....ठंडी हवा मैं .........
लेकिन वहीँ दूसरी और किसान दुआ करता है की कुछ दिन और मत बरसना राम जी ....अनाज सुखा पड़ा है ....काट कर घर रख लूं तो साल भर को खाने को हो जाएगा ....वरना सब बेकार....!!
एक झोपड़ी मैं लेटी बूढी नानी अपने धेवते को देख कर बोलती है की आज कुछ कम है ताप , हे भगवान् आज मौसम ठंडा मत करो दवा के पैसे भी नहीं ...
कमाल है ...इश्वर किस तरह से देखे ये सब ....सब की अपनी अपनी ख्वाहिशें हैं और अपने अपने भगवान् ...!!
ये लोग घूमने इस लिए निकलते हैं की कुछ अनियमित खा कर शुगर और शारीर बिगड़ गया है ...और सुधार के लिए घूमना चाहते हैं .....ठंडी हवा मैं .........
लेकिन वहीँ दूसरी और किसान दुआ करता है की कुछ दिन और मत बरसना राम जी ....अनाज सुखा पड़ा है ....काट कर घर रख लूं तो साल भर को खाने को हो जाएगा ....वरना सब बेकार....!!
एक झोपड़ी मैं लेटी बूढी नानी अपने धेवते को देख कर बोलती है की आज कुछ कम है ताप , हे भगवान् आज मौसम ठंडा मत करो दवा के पैसे भी नहीं ...
कमाल है ...इश्वर किस तरह से देखे ये सब ....सब की अपनी अपनी ख्वाहिशें हैं और अपने अपने भगवान् ...!!
Tuesday, February 28, 2012
गुल्लक से भी कीमत वाले,तुझ संग बीते ,वो पलछिन !!
" कांच के टूटे छल्लों जैसी ,
मेरी - तेरी यादें और दिन !
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते , वो पलछिन !!
युगों- युगों की प्यास बुझाते,
मन शब्दों के सुलझे बोल ,
मर्यादित से, स्पर्श आलिंगन,
अनजाने अवरोधों के बिन !! "
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते ,वो पलछिन !!
मेरी - तेरी यादें और दिन !
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते , वो पलछिन !!
युगों- युगों की प्यास बुझाते,
मन शब्दों के सुलझे बोल ,
मर्यादित से, स्पर्श आलिंगन,
अनजाने अवरोधों के बिन !! "
गुल्लक से भी कीमत वाले,
तुझ संग बीते ,वो पलछिन !!
Friday, February 24, 2012
नदियों की लहरें का कम्पन, मिलते और बिछुड़ते मीत !
" कितना कठिन होता है कभी कभी ऐसी परिस्थिति का सामना करना जो अपनापन होने के ढोंग जैसी हो...अपनेपन सा नहीं ....!! " अपने अपने जीवन मैं हम सब एक ना एक बार ऐसे किसी अनुभव से दो चार ज़रूर हुए होते हैं...हाँ ये ज़रूर है की समझ मैं तब आता है जब कुछ समझने लगते हैं ...यानि बड़े होते है और तब तक सब कुछ घट चूका होता है....और घटना तजुर्बा हो जाती है .....
"नदियों की लहरें का कम्पन,
मिलते और बिछुड़ते मीत !
अपनों का कुछ अपनापन,
बहते झरने, बूँदें और नीर ,
मन एकांकी, सन्नाटों सा ,
स्वयं संजोया कुछ संगीत !!"
"नदियों की लहरें का कम्पन,
मिलते और बिछुड़ते मीत !
अपनों का कुछ अपनापन,
बहते झरने, बूँदें और नीर ,
मन एकांकी, सन्नाटों सा ,
स्वयं संजोया कुछ संगीत !!"
Monday, February 20, 2012
रिश्तों-रिश्तों सब नजदीकी, शब्दों-शब्दों सारे राज !!
" पलकों-पलकों कल के सपने,
हाथों-हाथों सबका आज !
रिश्तों-रिश्तों सब नजदीकी,
शब्दों-शब्दों सारे राज !!
कल इनके फिर अर्थ नीचोड़ें,
मन-मंथन में दोहराएँ,
पवन सलोने झोकों के संग,
धीरे धीरे सो जाएँ !! "
हाथों-हाथों सबका आज !
रिश्तों-रिश्तों सब नजदीकी,
शब्दों-शब्दों सारे राज !!
कल इनके फिर अर्थ नीचोड़ें,
मन-मंथन में दोहराएँ,
पवन सलोने झोकों के संग,
धीरे धीरे सो जाएँ !! "
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