Friday, August 5, 2011

" दोस्ती की उम्र "

" दोस्ती की उम्र " , कितना अव्यवहारिक प्रश्न है ना ....किन्तु प्रश्न है ! अब जब प्रश्न है तो उत्तर भी होगा ...! जी हाँ है ....! समझदार लोगों के उत्तर निराशाजनक होंगे ...और जो हल्का सोचते हैं उनके  उत्तर मन को तसल्ली देंगे ! 

.... जब दोस्ती सोच समझ कर की जाये तो खतरनाक है , लेकिन जब दोस्ती हो जाये तो उम्मीद है ! ये एसा ही है, जैसा की आपका रिश्ता या  प्यार आपके बयोलोगिकल संतान से कुछ और होता है और गोद लिए बच्चे के साथ कुछ और होता है ....! 

दोस्ती होने दीजिये .... करने मैं वव्साय की बू आती है !!

Thursday, August 4, 2011

जो हो जैसा , उसको वैसा आईना दिखलाइए !

" दिन के सारे अनुभवों को दोहराने की बात नही ,
       किसी के अच्छे आचरण पर लुट जाने की बात नही !
              जो हो जैसा ,  उसको वैसा आईना    दिखलाइए ,
                    दूरी अच्छी , खुद को मिटाकर कुछ पाने की बात नही !! "

Monday, July 25, 2011

" अख़बारों की स्याही ने भी धुंधला आँचल ओढ़ लिया "

" अख़बारों की स्याही ने भी धुंधला आँचल ओढ़ लिया ,
        सूरज ने भी अपनी किरणों की बांहों को सिकोड़ लिया !
                 हम तुम भी अब घर की राह पर धीरे धीरे बढ़ जाएँ ,
                         किरने सोयीं , पंछी सोये , सुख सपनों मैं खो जाएँ !!
                                                  ----------------------- धीरे धीरे सो जाएँ !!
                                                                                                  -- :             मनीष

Sunday, July 24, 2011

समय के साथ चलिए ... पकड़ने की कोशिश हमेशा आपको पीछे रखेगी !

" अनुभव " कितना सहज शब्द है ना ? जी हाँ , किन्तु आता ये अपने पास बहुत असहजता से...! अब देखिये ना कल तक आपके अपने संपर्को के लिए आपने कितने शब्द चुन रखे थे और आज कुछ के मने बदल गए ...ये हमें खुद बदलने पड़े ! कुछ सुखद हो गए ...कुछ दूरी बना गए ....! जो भी हो ...आपका अनुभव आपके साथ साथ औरों के लिए भी सहाय होता है ...जीवन को सहजता से लेने और जीने के लिए !!

नीम और शहतूत का स्वाद ...सिर्फ नाम भर लेने से आपकी जुबां पर आ जाता है...  ऐसे ही कुछ रिश्ते अपना स्वाद इस तरह से छोड़ जाते हैं की उन लोगो का नाम भर लेने से आपके  पुरे जीवन मैं एक अनुभव अपना वजूद सामने ले आता है ....कई बार शेह्तूत की तरह और कभी नीम की तरह .... !!

समय के साथ चलिए ... पकड़ने की कोशिश हमेशा आपको पीछे रखेगी ... जो जाता है जाने दो ..आने वाले का स्वागत करिए ... अगर साथ नहीं चल सकते तो !!

Thursday, July 21, 2011

व्यावहारिक रहिए , हर वक़्त तिज़रत अछी नई होती भाई .....!!

 शालीनता और संस्कारीकता दो प्रथक प्रथक व्यवहार हैं ! दोनो को जोड़ कर नही देखा जाना चाहिए !! एक होता है और एक अपनाना पड़ता है !! जो होता है उसपर क्या कहिए किंतु अपनाए जाने वाले के पीछे के कारण , कई बार उसका अर्थ बदल देते हैं !! आप किस परिवार से आते है ये आहें नही किंतु आप कैसा परिवार बनाते हैं ......महत्वपूर्ण है !! आपसे जुड़ने वाले को यदि ये एहसाह हो गया की आप अपने हित साधने हेतु शालीन होने का ढोंग कर रहे है तो वो पल आपके संस्कार पर भी भारी पड़ सकता है ...... व्यावहारिक रहिए , हर वक़्त तिज़रत अछी नई होती भाई .....!!"

जैसे सब के अपने अपने ईश्वर होते हौं ना उसी तरह से सब की अपनी अपनी बारिश !!

" आज बारिश थी !" जैसे सब के अपने अपने ईश्वर होते हौं ना उसी तरह से सब की अपनी अपनी बारिश !!
कोई सूखे खेत के लिए , कोई गर्मी से बचने के लिए , कोई अपने नये मकान की तराई के लिए ....कोई अपने कपड़ो को बचाने के किए , कोई अपने झोपडे मैं पानी ना आए इस की दुआ के साथ , कोई फाइव गार्डेन मैं भीगने के लिए और कोई एक दिन की दिहाड़ी मिलजाए के काम की तलाश मैं ...बारिश को आने पर निराशा से और कोई उसके आने को आशा से देखता है ....." सच हैं किसी के ना रहने पर ही उसकी महत्ता पता लगती है ....रहने पर तो सब अपने हित देखते हैं " वाह रे इंसान !! " जी हा मैं भी इंसान हू ...और आप भी तो !! चलिए अगली बार नये दृष्टिकोण से देखेंगे ! "

" हम कब हम हैं जब सब हमे माने .... "

" हम कब हम हैं जब सब हमे माने .... " हाँ आप कह सकते हैं की ज़रूरत क्या है किसी से एसा कहलवाने की ? " ज़रा सोचिए अगर एसा नही है तो हम ज्ञानी होने के बावज़ूद एग्ज़ॅम क्यों देते हैं ....और सर्टिफिकेट क्यों लेते हैं....बिना आपके पास सेरटिफीकटे के आपको कोई ज्ञानी मान लेता हैं ? "
हमारे सिर्फ़ हम होने और सबके हम होने मैं फ़र्क है....जीवन अकेले अपने दम पर ही नही चलता ....हमे लगता हैं की हम सब अपने दम पर कर रहे हैं किंतु ....हमरे साथ बहुत से हम होते हैं जो हमे सब का हम बनाते हैं ...अतः सब के बानिए क्यों की आप सब की वजह से हैं ....आप के गुजरने के बाद आप को सब याद रखेंगे क्योंकि सब ने आपको बनाया और आप सब के हम हैं......अकेले के नही......यदि आप मैं कुछ है तब ही ...."